सर्दी में गले और छाती के रोगों से बचाव के लिए कुछ टिप्स

सर्दी शुरू हो चुकी है और आती हुई सर्दी और जाती हुई सर्दी बहुत नुकसान दायक होती है। इसमें सावधानी रखनी जरूरी है। इसमें ज्यादातर हमें गले और छाती के रोग ज्यादा होते है। इसलिए आज आपको इनसे बचाव के उपाय बताने जा रहें हैं।

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हिन्दी इंटरनेट में। आज हम बात करेंगे की कैसे हम गले और छाती के रोगों से बच सकते हैं। यहां कुछ उपाय बताये गये हैं आप उन्हें अपना सकते हो।

गला और छाती की बीमारियों का इलाज

1. गले में के अंदर कैसे भी बीमारी हो या किसी भी प्रकार का कोई भी इन्फेक्शन हो तो इसके लिए हल्दी सबसे अच्छी मानी जाती है ।

2. अगर गले में खरास है ,खासी है, गले के अंदर कफ जमा हुआ है तो इन सब बिमारिओं में केवल आधा चम्मच कच्ची हल्दी का रस लेना चाहिए। कुछ देर तक उसे मुह में रखना चाहिए। दोस्तो केवल एक खुराक से ही ये गले की सभी बीमारी ठीक हो जायेगी।

3. गले और छाती से ही जुडी खांसी भी होती है। इसके लिए एक दवा तो हमने बता दी है कच्ची हल्दी और एक और भी जबरदस्त दवा है अदरक। अदरक से खांसी को दूर करने के लिए अदरक के टुकड़े को मुह में रखकर चूसना चाहिए। इससे भी खांसी तुरंत ठीक हो जाती है।

4.  जब किसी का चेहरा खांसी के कारण लाल हो जाता है। मतलब की जिसकी खांसी रुकने का नाम ही नहीं लेती तो उसको अदरक का रस लेना चाहिए। और इसमें पान का रस भी मिला सकते हो। अब इसके अन्दर थोडा गुड या शहद मिलाकर एक दो चम्मच इनको गर्म करके लेना चाहिए। खांसी तुरंत आराम हो जायेगा। खांसी अनार के रस से भी ठीक हो जाती है।

5. गले और छाती की बीमारियों में दमा, अस्थमा जैसी बीमारी भी होती है। इन्हें ठीक करने के लिए गाय का मूत्र सबसे अच्छी दवा मानी जाती है। हर रोज सुबह-सुबह अगर 1/2 कप गाय का मूत्र पिया जाये तो इससे दमा बिल्कुल ही ठीक हो जाता है। इसका एक और फायदा यह भी है की इससे टीबी भी ठीक होती है।

6.  दमा और अस्थमा के लिए दालचीनी भी अच्छी दवा होती है। दालचीनी के पाउडर हर रोज सुबह-सुबह 1/2 चम्मच खाली पेट इसको शहद मिलाकर इसको गर्म पानी के साथ लेने से दमा और अस्थमे में आराम लगता है।

तो दोस्तो ये थे कुछ साधारण से कुछ उपाय जो गले और छाती के लिए लाभकारी साबित होते है। 
आशा है आपको ये पसंद आये होंगे।

सर्दी में गले और छाती के रोगों से बचाव के लिए कुछ टिप्स Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Mukesh Sharma

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