स्त्री पुरुष संबंध - सामंजस्य और मधुरता कैसे रहे

स्त्री पुरुष संबंध
पति-पत्नी का रिश्ता बहुत ही पवित्र बताया गया है। स्त्री पुरुष संबंध किसी गाड़ी के पहियों की तरह है, जिसमें थोडा सा असंतुलन आने पर दोनों बिखर जाते हैं। अक्सर देखा जाता है कि किसी जोडे की शादी के बाद उनके रिश्ते में बहुत बदलाव आने लगता है। और इस खूबसूरत रिश्ते में धीरे-धीरे दरार आने लगती है। उनका ये रिश्ता डगमगाने लगता है।


स्त्री पुरुष संबंध को ऐसे बेहतर बनाए रखें

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आइये जानते है, वे महत्वपूर्ण बातें, जो जीवनसाथी कहे जाने वाले इस स्त्री पुरुष संबंध में मधुरता बनाए रखने और बढ़ाते रहने के लिए आवश्यक है और आपके वैवाहिक जीवन में सुख और खुशियों की बहार लाती रहेगी। 

1. एक दूसरे को सम्मान दें :

जीवन में कोई भी पूरी तरह से सर्व-गुण संपन्न नहीं होता, सभी में कोई न कोई कमजोरी या कमी होती है, लेकिन सभी किसी न किसी प्रकार की विशेषताओं और गुणों से भी भरपूर होते है। 

इसलिए आपके साथी की स्वयं या किसी अन्य से तुलना कर उसे नीचा दिखाने की कोशिश न करें। हमेशा उन्हें सम्मान दें और जीवन में आगे बढ़ने और प्रगति करने में सहयोग करें। 

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2. एक दूसरे की भावनाओं और इच्छाओं को महत्त्व दें

जीवन के अपने अनुभवों और माहौल के अनुसार हर किसी का मन, सपने, इच्छाएं और भावनाएं अलग अलग होती है, इसलिए यह न समझें की आपकी भावनाएं उनकी भावनाओं से ज्यादा जरुरी है, एक दूसरी की इच्छाओं और भावनाओं को बराबर सम्मान दें। 


3. सम्बन्धों को हल्के में न लें, महत्त्व दें

अक्सर ऐसा होता है, कि जैसे जैसे हम एक दूसरे को ज्यादा करीब से जानने लगते है तो अपने रिश्ते तो "ग्रांटेड" लेने लगते है, इससे रिश्तें को हम विशेष  महत्त्व देना बंद कर देते है। 

ऐसा न करें, इस रिश्ते के महत्त्व देते रहें और इसे और ख़ुशनुमा बनाने की दिशा में प्रयास करते रहें। 

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4. आर्थिक मजबूती के लिए प्रयासरत रहें 

आर्थिक रूप से सक्षम होना आपके परिवार की जरूरतों के लिए बहुत आवश्यक होता है, अक्सर ऐसा देखने में आता है कि आर्थिक तंगी परिवार में तनाव और अनेक प्रकार के अन्य मुद्दों का कारण बनती है।

इसलिए सही प्रकार से अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में प्रयास करते रहें। जीवन में आर्थिक रूप से मजबूती आपके सामूहिक सम्बन्ध को भी मजबूती प्रदान करेगी।

5. आपसी संवाद का महत्त्व समझें

कई बार हमें एक दूसरे से किसी प्रकार की शिकायत और परेशानी हो सकती है, ऐसी बातों को या तो हम अपने मन में ही दबा कर रखते है, या बड़े ही गलत प्रकार सेअभिव्यक्त करते है।

इन दोनों से ही रिश्ते पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, इसलिए किसी भी मसले पर शांति से अपने मन की बात साथी को कहें और बताएं कि आपको क्या सही नहीं लग रहा।

हो सकता है कि कोई ग़लतफ़हमी ही हो, जो प्रेम और समझदारी से किये गए आपसी संवाद से आसानी से दूर हो सकती है।

6. किसी विवाद में तीसरे को शामिल न करें

किसी तीसरे व्यक्ति के सामने आप अपने साथी की शिकायत करेंगेया उसका अपमान करेंगे तो यह उसके मन में आपके लिए बहुत दुरी बना सकता ।

यदि आप किसी तीसरे के सामने अपना विवाद व्यक्त करते है, तो यह आपकी ही कमजोरी होगी कि आप आपसी समझ से एक दूसरे से अपने मसले हल नहीं कर सकते।

इसलिए ऐसी गलती, कभी न करें।

Stri Purush Mansik Sukh

7. मानसिक और भावात्मक सुख ज्यादा जरुरी 

इस ग़लतफ़हमी में न रहें की साथी आपसे सिर्फ दैहिक सुख की चाह रखता है, वह सुख तो बस कुछ क्षणों का होता है, बाकि समय तो हम अपने मन और भावनाओं के जंजालों में ही घिरे होतें है।

इसलिए मन और भावनाओं के आत्मिक स्तर पर साथी से जुड़ना और उनके मन और भावनाओं का सभी प्रकार से सम्मान करना ज्यादा आवश्यक है।

8. एक दूसरे को समय दें 

आजकल की भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में हमारा ज्यादातर समय अपनी रोजी-रोटी कमाने और अपने करियर या व्यापार को आगे बढ़ाने में ही निकल जाता है।

इसलिए यह न सोचें कि आपका साथी आपके द्वारा खरीदी गयी वस्तुयों और साधनों में ही खुश रहेगा।

आप उन्हें समय दें, उनकी बातों को अपना पूरा ध्यान देकर सुने। समय समय पर उनके साथ बाहर घूमने जाएँ और विशेष उनके लिए कार्यक्रम बनायें।

इससे उन्हें यह अहसास होता रहेगा कि आप उनके साथ अपने रिश्ते को कितना महत्त्व देते हो।

Vaivahik rishte ko samay den

9. घर की जिम्मेदारियों को बांटे और एक दूसरे का हाथ बंटाएं 

घर पर यह न समझें कि घर के कामों की सारी जिम्मेदारी आपके साथी की ही है, यदि आप उनके काम में भी हाथ बंटाएंगे तो ये एक दूसरे की करीबी को और बढ़ाएगा और आपके साथी के काम के बोझ को भी कम करेगा।

10. सराहना करें 

अपने साथी के बेहतरीन कार्यों, उपलब्धियों और घर-परिवार में उनके योगदान के लिए यदि आप उनको कुछ प्रशंसा के शब्द कहेंगे, तो यकीन मानिए उनके लिए वे बहुत की अमूल्य और ख़ुशी के पल होंगे।

ये उनको उस दिशा में और प्रयास से कुछ बेहतर करने के लिए प्रेरित करेंगे।

इसलिए इसमें कभी भी कंजूसी न करें।

11. यथार्थवादी उम्मीदें रखें 

कई बार हम अपने साथी और सम्बन्ध से ऐसी ऐसी उम्मीदें पाल लेते है, जो बहुत ही दुस्वार होती है।

अपने साथी को उसके प्रयास में सहयोग दें, लेकिन उन पर अधिक उम्मीदों का बोझ न डालें।

अ-यथार्थवादी उम्मीदें पूरी होने तक भी तनाव का कारण बन सकती है और पूरी न होने पर भी रिश्ते में टकराव और दूरियां बढ़ा देती है।

12. प्रेम देना ही पाना है

किसी ने सच ही कहा है - "प्रेम भीख में नहीं मिलता है उसे जितना लुटाओगे उतना ही मिलेगा"

इसलिए प्रेम की चाह मन में है, तो इसे मांगने की बजाय देते रहें, तभी आपको आपके साथी का प्रेम स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता रहेगा।

13. सन्तुष्टता में ही कल्याण 


अर्थात - जिस परिवार में स्त्री से पुरुष संतुष्ट रहता है और पति से स्त्री, वहां हमेशा कल्याण होता है।

इसलिए अपने जीवन के कल्याण के लिए इस सम्बन्ध को महत्त्व दें और एक दूसरे को खुश और संतुष्ट रखें और स्वयं भी रहें।

दाम्पत्य जीवन में स्त्री पुरुष संबंध का मुख्य आधार है पति पत्नी का परस्पर प्रेम, विश्वास, ईमानदारी तथा समर्पण है। इन सभी गुणों का होना दाम्पत्य जीवन में अत्यन्त आवश्यक है, इसलिए अपने जीवन के कल्याण की इस राह पर जीवनसाथी के साथ सामंजस्य और मधुरता के लिए उपरोक्त बातों को याद रखें और अमल में लाते रहें। 

इस विषय पर अन्य उपयोगी लिंक

स्त्री पुरुष संबंध - सामंजस्य और मधुरता कैसे रहे Rating: 4.5 Diposkan Oleh: Kheteshwar Boravat

7 Comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (13-06-2016) को "वक्त आगे निकल गया" (चर्चा अंक-2372) पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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